टनकपुर/चम्पावत। टनकपुर के अस्पताल रोड स्थित वार्ड नंबर-3 में वन विभाग ने अवैध लकड़ी के कारोबार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक लकड़ी टाल से भारी मात्रा में संदिग्ध लकड़ी बरामद की है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि लकड़ी को जमीन के नीचे दफनाकर छिपाया गया था, जिसे वन विभाग की टीम ने खुदाई कर बाहर निकाला।
कार्रवाई के दौरान अब तक करीब 60 से अधिक लकड़ी के लट्ठे बरामद किए जा चुके हैं। मामले में टाल संचालक के खिलाफ वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

सूत्रों के अनुसार वन विभाग को अवैध भंडारण की सूचना मिलने के बाद शुक्रवार दोपहर से अभियान शुरू किया गया। शुरुआती चरण में वन कर्मियों ने फावड़े, गैंती, सब्बल और अन्य उपकरणों की मदद से खुदाई की। शनिवार को कार्रवाई को तेज करने के लिए जेसीबी मशीन भी मौके पर लगाई गई।
बरामदगी अभियान की निगरानी स्वयं हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ कुंदन कुमार कर रहे हैं। नंधौर उप प्रभागीय वनाधिकारी (एसडीओ) के नेतृत्व में छकाता रेंज की टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र को अपने नियंत्रण में लेकर जांच और बरामदगी की कार्रवाई को अंजाम दिया।

क्या टनकपुर में दिखी ‘पुष्पा’ स्टाइल की कहानी?
साउथ की सुपरहिट फिल्म Pushpa: The Rise में लाल चंदन की लकड़ी की तस्करी और उसे छिपाकर एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के कई रोमांचक दृश्य दिखाए गए थे। टनकपुर में सामने आए इस मामले ने भी लोगों को उस फिल्म की याद दिला दी है। फर्क सिर्फ इतना है कि यह कोई फिल्मी पर्दे की कहानी नहीं, बल्कि वास्तविक कार्रवाई है, जहां वन विभाग ने जमीन के नीचे दबाकर रखी गई लकड़ी को खुदाई कर बाहर निकाला।
स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि जिस तरह फिल्म में तस्कर प्रशासन की नजरों से बचने के लिए नए-नए तरीके अपनाते थे, उसी तरह यहां भी लकड़ी को जमीन के भीतर छिपाकर रखने का तरीका अपनाया गया। हालांकि यह जांच का विषय है कि बरामद लकड़ी कहां से लाई गई और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।

टनकपुर के अस्पताल रोड स्थित जिस टाल से जमीन के नीचे दबे लकड़ी के दर्जनों लट्ठे बरामद हुए, उसे जगदीश तिवारी से संबंधित बताया जा रहा है। इस सनसनीखेज बरामदगी के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित टाल संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे खेल की परतें खुलेंगी और यह सामने आएगा कि आखिर भूमिगत लकड़ी भंडारण के इस कथित नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
वन विभाग की प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि बरामद लकड़ी का संबंध वन विकास निगम के डिपो या अन्य वन क्षेत्रों से हो सकता है। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि लकड़ी किस स्रोत से लाई गई और इसे अवैध रूप से छिपाने के पीछे किन लोगों की भूमिका रही।
अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं।
विभागीय भूमिका भी जांच के दायरे में
वन विभाग इस मामले को केवल अवैध भंडारण तक सीमित नहीं मान रहा है। जांच का दायरा बढ़ाते हुए उन विभागीय कर्मचारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है, जिनकी लापरवाही या संभावित संलिप्तता से यह गतिविधि लंबे समय तक चलती रही हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, यदि किसी स्तर पर मिलीभगत के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बरामदगी का अभियान अभी जारी है और आगे भी और लकड़ी मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विभाग पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए विस्तृत जांच कर रहा है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अवैध लकड़ी कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और तथ्य एवं साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
टनकपुर में हुई इस कार्रवाई को अवैध लकड़ी कारोबार के खिलाफ अब तक की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। जमीन के नीचे दबाकर लकड़ी छिपाने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों की नजर अब जांच के अंतिम निष्कर्षों पर टिकी है, क्योंकि माना जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण में कई अहम खुलासे अभी बाकी हैं।
फिलहाल वन विभाग की कार्रवाई जारी है और जांच पूरी होने के बाद पूरे नेटवर्क से पर्दा उठने की उम्मीद जताई जा रही है।


