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“विकास चाहिए, विनाश नहीं: टनकपुर–बनबसा फोरलेन परियोजना में बदलाव की मांग तेज”

टनकपुर–बनबसा फोरलेन पर उठे सवाल, वैकल्पिक मार्ग की मांग तेज

टनकपुर–बनबसा राष्ट्रीय राजमार्ग के प्रस्तावित फोरलेन निर्माण को लेकर क्षेत्र में जनचिंताएं लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। इसी क्रम में सामाजिक कार्यकर्ता दीप चंद्र पाठक द्वारा जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए एक विस्तृत ज्ञापन प्रेषित किया गया है।

यह ज्ञापन उपजिलाधिकारी पूर्णागिरी (जनपद चम्पावत) के माध्यम से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी तथा केंद्रीय राज्य मंत्री एवं क्षेत्रीय सांसद अजय टम्टा को भेजा गया है।

ज्ञापन में वर्तमान प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण योजना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया है कि परियोजना का प्रस्तावित मार्ग घनी आबादी, स्थानीय बाजारों और कृषि भूमि से होकर गुजर रहा है, जिससे आम नागरिकों, किसानों, व्यापारियों एवं विद्यार्थियों पर व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

प्रेषित बिंदुओं में उल्लेख किया गया है कि सड़क चौड़ीकरण के चलते बड़ी संख्या में आवास एवं व्यवसाय प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही सीमांत किसानों की कृषि भूमि पर भी असर पड़ने की संभावना जताई गई है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है।

इसके अतिरिक्त, ककराली गेट से बनबसा तक स्थित विद्यालयों में अध्ययनरत हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि टनकपुर और बनबसा के प्रमुख बाजारों तथा बस स्टेशनों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों का आवागमन होता है, जिससे यातायात दबाव और बढ़ सकता है। चूंकि यह मार्ग प्रसिद्ध पूर्णागिरी धाम के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है, इसलिए श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए सड़क सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय बन जाता है।

सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा यह सुझाव भी दिया गया है कि देश के अन्य शहरों की तर्ज पर यहां एलिवेटेड रोड या वैकल्पिक बाईपास जैसे विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि जनहानि और आर्थिक नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।

ज्ञापन में मांग की गई है कि टनकपुर–बनबसा मार्ग पर एलिवेटेड सड़क अथवा वैकल्पिक बाईपास को स्वीकृति दी जाए। प्रस्तावित वैकल्पिक मार्ग को जगबुड़ा पुल से हुड्डी क्षेत्र होते हुए किरोड़ा नाले के पास से निकाले जाने का सुझाव दिया गया है, जिससे कम से कम भूमि अधिग्रहण हो और स्थानीय जनता को राहत मिल सके।

अंत में शासन और संबंधित विभागों से अपेक्षा की गई है कि वे जनहित को प्राथमिकता देते हुए इस विषय पर शीघ्र और संतुलित निर्णय लें, ताकि विकास कार्यों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों के हितों की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Shubham Gaur

Written by Shubham Gaur

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