चम्पावत। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है, लेकिन इस बार मामला सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है—बल्कि प्रदेश के विकास बनाम भ्रामक राजनीति की बहस में बदलता दिख रहा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदीयाल के कुमाऊं-गढ़वाल पर दिए बयान और सरकार पर लगाए गए आरोपों ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है, वहीं भाजपा ने इस पर जोरदार पलटवार करते हुए अपनी उपलब्धियों को सामने रखा है।

भाजपा नेताओं ने साफ कहा है कि कांग्रेस जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। पार्टी का कहना है कि उत्तराखंड सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में सड़क, स्वास्थ्य, पर्यटन और धार्मिक यात्रा व्यवस्थाओं में अभूतपूर्व सुधार किए हैं।
चम्पावत के वरिष्ठ उप ब्लॉक प्रमुख भुवन चंद पांडे ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा: “कांग्रेस के पास न कोई विजन है और न ही कोई ठोस मुद्दा। इसलिए वे क्षेत्रवाद और धर्म के नाम पर समाज को बांटने का काम कर रहे हैं। लेकिन उत्तराखंड की जनता अब जागरूक हो चुकी है और ऐसे भ्रामक बयानों में नहीं आने वाली।”
गणेश गोदीयाल ने अपने बयान में आरोप लगाया कि सरकार के पास न नीति है और न व्यवस्था, जिसकी वजह से चार धाम यात्रा सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रही।
हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चार धाम यात्रा को पहले से अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाया गया है। पंजीकरण प्रणाली, ट्रैफिक मैनेजमेंट, हेल्थ सुविधाओं और आपदा प्रबंधन में बड़े सुधार किए गए हैं, जिससे लाखों श्रद्धालुओं को सुविधा मिल रही है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि: “जब पूरी दुनिया उत्तराखंड की व्यवस्थाओं की सराहना कर रही है, तब कांग्रेस सिर्फ नकारात्मक राजनीति कर रही है। उन्हें चाहिए कि वे तथ्यात्मक बात करें, न कि बेबुनियाद आरोप लगाएं।”

कुमाऊं-गढ़वाल जैसे संवेदनशील क्षेत्रीय मुद्दों को उठाने पर भाजपा ने इसे “उत्तराखंड की एकता पर सीधा हमला” बताया है। पार्टी का कहना है कि राज्य का गठन ही एकजुटता के आधार पर हुआ था और ऐसे बयान उस भावना को कमजोर करते हैं।
जिला महामंत्री पूरन मेहरा, मंडल अध्यक्ष तुलसी कुवंर, मंडल महामंत्री कुमुद जोशी और हरीश कलौनी सहित कई भाजपा कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि: “भाजपा सरकार विकास और जनकल्याण के एजेंडे पर काम कर रही है, जबकि कांग्रेस सिर्फ भ्रम और विभाजन की राजनीति में उलझी हुई है।”
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि उत्तराखंड की राजनीति अब विकास बनाम बयानबाज़ी के बीच खड़ी है। एक तरफ भाजपा अपनी उपलब्धियों और योजनाओं को गिना रही है, वहीं कांग्रेस के बयान सवालों के घेरे में हैं।
अब देखना होगा कि गणेश गोदीयाल अपने बयान पर क्या सफाई देते हैं या फिर यह सियासी संग्राम और तेज होता है। फिलहाल इतना तय है कि उत्तराखंड की राजनीति में गर्मी अभी और बढ़ने वाली है।


