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“हमें शराब की दुकान नहीं, स्कूल और पानी चाहिए”: कालीगूंठ के ग्रामीणों ने व्यवस्था के खिलाफ बुलंद की आवाज

“प्रशासन की जिद पर भारी जनभावना: शराब की दुकान खुली तो उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे ग्रामीण”

चंपावत/टनकपुर: उत्तराखंड के सीमांत जिले चंपावत के कालीगूंठ (पूर्णागिरी) क्षेत्र में विकास की परिभाषा को लेकर जनता और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। ग्राम प्रधान पंकज तिवारी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने ‘चुका’ क्षेत्र में शराब की दुकान खोलने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है।

सोमवार को उपजिलाधिकारी को सौंपे गए एक ‘पुनः स्मरण पत्र’ में ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि वे शराब के बदले बुनियादी विकास चाहते हैं। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि पूर्व में विरोध जताने के बावजूद प्रशासन दुकान खोलने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है, जो स्थानीय जनभावनाओं का अपमान है।

विकास के लिए ‘मधुशाला’ नहीं ‘पाठशाला’ की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र को शराब की दुकानों की नहीं, बल्कि बेहतर स्कूलों, स्वच्छ पेयजल, सुचारू बिजली और शिक्षा के बेहतर बुनियादी ढांचे की जरूरत है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जनहित को दरकिनार कर शराब की दुकान खोली गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस ज्ञापन की प्रतियां कुमाऊं कमिश्नर और जिला आबकारी अधिकारी को भी भेजी गई हैं।

Shubham Gaur

Written by Shubham Gaur

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