चंपावत जनपद के बाराकोट ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले बोतड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित शराब की दुकान को लेकर स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। यह विरोध केवल एक दुकान के खिलाफ नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, सामाजिक संतुलन और जनहित से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र केवल एक सामान्य बस्ती नहीं, बल्कि रामेश्वर धाम जैसा पवित्र तीर्थ स्थल है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान रामेश्वर महादेव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां की वादियों में भक्ति की गूंज सुनाई देती है और हर दिन सैकड़ों लोग आध्यात्मिक शांति की तलाश में आते हैं।
स्थानीय लोगों का यह भी मानना है कि सरयू नदी और रामगंगा नदी का पवित्र संगम इस क्षेत्र को और भी धार्मिक महत्व प्रदान करता है। ऐसे में यहां शराब की दुकान खोलना न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करेगा, बल्कि सामाजिक माहौल पर भी नकारात्मक प्रभाव डालेगा।
गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं ने एक स्वर में कहा है कि यह निर्णय क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान के विपरीत है। उनका मानना है कि शराब की दुकान खुलने से युवाओं पर गलत असर पड़ेगा, पारिवारिक ताने-बाने में दरार आएगी और क्षेत्र की शांति भंग हो सकती है।
आर्थिक दृष्टि से भी ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र तीर्थ पर्यटन पर आधारित है, जहां श्रद्धालुओं की आस्था ही स्थानीय लोगों की आजीविका का आधार है। यदि यहां का धार्मिक माहौल प्रभावित होता है, तो इसका सीधा असर स्थानीय व्यापार और रोजगार पर पड़ेगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील करते हुए कहा है कि जनभावनाओं का सम्मान किया जाए और इस प्रस्ताव को तत्काल निरस्त किया जाए। उन्होंने चेतावनी भी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे जनआंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
यह मामला अब केवल एक दुकान के खुलने या न खुलने का नहीं, बल्कि आस्था, समाज, और जनहित के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बन चुका है।


