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इस दशहरे नहीं जलेगा रावण का पुतला, सोनम रघुवंशी का होगा पुतला दहन।

दशहरे पर जलेगा सोनम रघुवंशी का पुतला, मुस्कान, शिवानी, रवीना और राधिका जैसी “कलियुग की शूर्पणखाएँ” भी रहीं चर्चा में।

दशहरे पर जलेगा “कलियुग की रावण” सोनम रघुवंशी का पुतला।

 

इंदौर।

इस बार दशहरा महोत्सव में इंदौर के महालक्ष्मी नगर स्थित मेला ग्राउंड पर एक अनोखा दृश्य देखने को मिलेगा। परंपरागत रावण दहन की जगह समाज को झकझोर देने वाले राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी सोनम रघुवंशी का पुतला दहन किया जाएगा।

 

आयोजकों का कहना है –

👉 “अब रावण सिर्फ त्रेतायुग की कथा तक सीमित नहीं है, बल्कि आज के समाज में भी मौजूद है। फर्क सिर्फ इतना है कि उसका चेहरा और रूप बदल गया है।”

 

 

सोनम रघुवंशी : “कलियुग की रावण”

 

सोनम ने अपने पति राजा रघुवंशी से शादी की थी, लेकिन इस रिश्ते से खुश नहीं थी। शादी के तुरंत बाद हनीमून पर मेघालय गई सोनम ने अपने प्रेमी राजा कुशवाहा और तीन शूटरों के साथ मिलकर पति की हत्या कर दी।

यह वारदात पूरे देश को हिलाकर रख देने वाली थी। सोशल मीडिया पर सोनम को “कलियुग की रावण” कहा जाने लगा।

 

 

ऐसी और घटनाएँ जिन्होंने चौंकाया

 

यह अकेला मामला नहीं है। बीते महीनों में कई महिलाएँ पति की हत्या के मामलों में सुर्खियों में रहीं –

 

मुस्कान रस्तोगी (मेरठ) – प्रेमी साहिल शुक्ला संग पति सौरभ की हत्या कर शव को सीमेंट ड्रम में छिपाया।

 

शिवानी (बिजनौर) – पति दीपक का गला दबाकर हत्या की और बहाना हार्ट अटैक का बनाया।

 

रवीना (भिवानी, हरियाणा) – यूट्यूबर, जिस पर आरोप है कि उसने अपने दोस्त संग पति की हत्या की।

 

राधिका (सांगली, महाराष्ट्र) – शादी के सिर्फ 15 दिन बाद पति की हत्या कर दी।

 

समाज में उठते सवाल

 

इन घटनाओं से समाज में कई सवाल उठ रहे हैं –

 

महिलाएँ ऐसे जघन्य अपराधों की ओर क्यों बढ़ रही हैं?

 

क्या यह सत्ता और नियंत्रण दिखाने का नया पैटर्न है?

 

क्यों महिला अपराधियों को समाज अलग नजरिए से देखता है?

 

 

सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स ने इन्हें और भी सुर्खियों में रखा है, जिससे यह चर्चाओं का बड़ा मुद्दा बन गया है।

 

 

कार्यक्रम की झलकियाँ

 

📌 शूर्पणखा – दहन कार्यक्रम

 

तारीख: 2 अक्टूबर 2025 (गुरुवार)

 

समय: शाम 4 बजे से 6:30 बजे तक

 

स्थान: मेला ग्राउंड, महालक्ष्मी नगर, बॉम्बे हॉस्पिटल पॉश्ट रोड, इंदौर

 

 

सामाजिक संदेश

 

आयोजकों ने स्पष्ट किया –

👉 “रावण पुरुष ही नहीं, महिला भी हो सकती है। जो भी समाज और रिश्तों को कलंकित करेगा, उसका अंत तय है। यह दहन सिर्फ पुतले का नहीं, बल्कि अपराध और विकृत मानसिकता का प्रतीक है।”

 

 

 

🔥 इस दशहरे का संदेश साफ है –

“बुराई चाहे किसी भी रूप में हो, उसका अंत निश्चित है।”

Shubham Gaur

Written by Shubham Gaur

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