टनकपुर की पंचमुखी गौशाला बनी गोवंशों की ढाल – प्रशासन की उदासीनता पर उठे सवाल, मुख्यमंत्री से गुहार
टनकपुर। संवाददाता।
जिस जिम्मेदारी को निभाना नगर पालिका और तहसील प्रशासन का दायित्व है, उसी बोझ को पिछले 15 वर्षों से टनकपुर की पंचमुखी गौशाला अपने कंधों पर ढो रही है। घायल और बीमार गोवंशों को बचाना, उनका इलाज कराना और देखभाल करना इस संस्था का कर्तव्य नहीं, बल्कि मानवीय कर्तव्य से भी आगे बढ़कर यह एक अनूठा उदाहरण है। दिन हो या रात, एक्सीडेंटल स्थिति हो या सड़क पर तड़पते गोवंश – पंचमुखी गौशाला परिवार उन्हें स्वयं अपने खर्च पर अस्पताल पहुँचाता है।

लेकिन सवाल यह है कि जब यह जिम्मेदारी नगर पालिका और तहसील स्तर पर शासन-प्रशासन की है, तो आखिर यह संस्था कब तक अपनी सीमित सामर्थ्य से यह कार्य करती रहेगी? प्रशासन की इस गहरी उदासीनता ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सचमुच व्यवस्था नाम की कोई चीज़ है भी या नहीं।
गौशाला प्रबंधन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पत्र लिखकर मांग की है कि इसे स्थायी गौशाला का दर्जा दिया जाए। पत्र में ICU वार्ड का निर्माण, भूमि आवंटन, चारे-भंडारण की सुविधा, घायल गोवंशों को सुरक्षित ढंग से लाने के लिए वाहन उपलब्ध कराने जैसी अत्यंत आवश्यक माँगें उठाई गई हैं।
एक्सीडेंटल घटनाओं को रोका जा सकता है
यह भी कटु सत्य है कि शहर और राष्ट्रीय राजमार्ग पर रोजाना होने वाले अधिकांश सड़क हादसे असहाय गोवंशों से टकराने की वजह से होते हैं। अगर इन गोवंशों को सड़क से हटाकर सुरक्षित गौशालाओं में रखा जाए तो न केवल निर्दोष पशुओं की जान बचेगी बल्कि मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा। दुर्घटनाओं के मामलों में लगातार आ रही शिकायतें इस ओर ध्यान खींचने का काम करती रही हैं, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
शासन-प्रशासन के लिए खुली चुनौती
टनकपुर की पंचमुखी गौशाला आज जीवित उदाहरण है कि कैसे एक गैर-सरकारी संस्था अपनी निस्वार्थ सेवा और करुणा से प्रशासन के काम को अंजाम दे रही है। लेकिन क्या सरकार और प्रशासन को अब भी नींद से जागने की जरूरत नहीं?
यदि सरकार वास्तव में “गौरक्षा” और “मानवता” की बात करती है तो उसे तत्काल इस गौशाला को स्थायी दर्जा देकर सुविधाएँ उपलब्ध करानी चाहिए। अन्यथा यह साफ संदेश जाएगा कि शासन केवल भाषणों तक ही सीमित है, जबकि वास्तविकता में गोवंश और मानव दोनों असुरक्षित हैं।
जनता की पुकार सुने मुख्यमंत्री
स्थानीय लोग और संस्था के सदस्य माननीय मुख्यमंत्री से यही गुहार लगा रहे हैं कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र कार्यवाही की जाए। क्योंकि यह सिर्फ गोवंश संरक्षण का ही नहीं बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा का भी मुद्दा है।


