टनकपुर। विश्व प्रसिद्ध मां पूर्णागिरि मेला के दौरान अस्थायी दुकानों को लगाने की अनुमति न मिलने से नाराज़ स्थानीय जनता और दुकानदारों का आक्रोश शुक्रवार को सड़कों पर फूट पड़ा। गुस्साए लोगों ने NHPC Limited प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए शारदा बैराज के निकट क्रेशर रोड पर NHPC के महाप्रबंधक ऋषि रंजन का पुतला दहन किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मेला शुरू हो चुका है, लेकिन अब तक दुकानों को लगाने की अनुमति नहीं दी गई है। व्यापारियों के मुताबिक पूर्णागिरि मेला टनकपुर के व्यापारियों के लिए साल का सबसे बड़ा व्यापारिक सीजन माना जाता है और लोग पूरे साल इस मेले का इंतजार करते हैं। ऐसे में दुकानों पर रोक से पूरे टनकपुर क्षेत्र के व्यापार पर असर पड़ रहा है।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि शारदा बैराज पुल के पास पिछले कई वर्षों से मेले के दौरान अस्थायी दुकानें लगती रही हैं, लेकिन इस बार अनावश्यक रोक और देरी के कारण व्यापारियों में भारी नाराज़गी है।
पुतला दहन के बाद प्रदर्शनकारी शारदा बैराज किनारे CISF बैरियर के पास आमरण अनशन पर बैठ गए। मौके पर पहुंचे व्यापार मंडल टनकपुर के पदाधिकारियों ने भी दुकानों को न लगने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए आंदोलन का समर्थन किया।
वहीं सामाजिक कार्यकर्ता दीप चंद्र पाठक पिछले करीब दस दिनों से दुकानदारों की मांग को लेकर स्थानीय प्रशासन से लगातार संवाद कर रहे हैं। वे लंबे समय से गरीब और पीड़ित लोगों की आवाज उठाते रहे हैं। पुतला दहन कार्यक्रम में भी वे दुकानदारों के साथ मौजूद रहे और शाम करीब 6 बजे से धरना स्थल पर बैठकर आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
दरअसल शारदा बैराज पुल एक संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है, जो भारत-नेपाल सीमा के बेहद करीब है। पड़ोसी देश नेपाल में 3 मार्च से 5 मार्च तक चुनावी प्रक्रिया चल रही थी, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से पुल पर आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई थी। यहां SSB और CISF की चौकियां और सुरक्षा बैरियर भी मौजूद हैं।
NHPC प्रबंधन के अनुसार शुरुआत में यहां केवल अस्थायी दुकानें लगती थीं, लेकिन धीरे-धीरे कई दुकानदार स्थायी रूप से रहने लगे और दुकानों की संख्या व क्षेत्र भी बढ़ने लगा। इससे दुकानदारों के बीच विवाद और झगड़े की घटनाएं सामने आईं, जिनमें कई बार मारपीट और पुलिस हस्तक्षेप तक की नौबत आ चुकी है।
बॉर्डर एरिया होने और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस बार दुकानों को अनुमति नहीं दी जा रही है। हालांकि पहले स्थानीय लोगों को मेले के दौरान तीन से चार महीने तक दुकान लगाने की अनुमति मिलती रही है।
फिलहाल एक तरफ जहां दुकानदार अपनी रोजी-रोटी के लिए आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन और NHPC सुरक्षा कारणों का हवाला दे रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस पूरे विवाद का समाधान कैसे निकलता है और मेले के दौरान व्यापारियों को राहत मिलती है या नहीं।


