टनकपुर/देहरादून:
उत्तरांचल परिवहन मजदूर संघ द्वारा उत्तराखंड परिवहन निगम के कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर 24 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया गया है। धरने के दूसरे दिन (25 अक्टूबर) कर्मचारियों ने निगम प्रबंधन और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

कर्मचारियों की 5 प्रमुख मांगें:
विशेष श्रेणी कर्मचारियों का नियमितीकरण: निगम में लंबे समय से कार्यरत विशेष श्रेणी कर्मचारियों को तुरंत नियमित किया जाए और नियमित होने तक ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ लागू हो।
नई बसों की खरीद: रोडवेज के बस बेड़े में 700 नई बसों की उपलब्धता, स्वीकृति और खरीद की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए।
समय पर वेतन भुगतान: परिवहन निगम के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को हर माह की 07 तारीख तक वेतन का अनिवार्य भुगतान किया जाए।
पृथक बजट एवं वित्तीय पुनर्गठन: अन्य राज्यों की तर्ज पर उत्तराखंड सरकार भी रोडवेज कर्मचारियों के वेतन, बसों की खरीद और देयकों के लिए पृथक ‘सैलरी सपोर्ट / फाइनेंशियल रीस्ट्रक्चरिंग’ बजट की व्यवस्था करे।
अर्द्धकुंभ के लिए विशेष फंड: आगामी अर्द्धकुंभ मेले को देखते हुए बसों, ईंधन और मरम्मत के खर्च के लिए सरकार अलग से ‘Special Transport Support Fund’ बनाए, ताकि इसका बोझ निगम के सामान्य बजट पर न पड़े।
धरने के दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में कर्मचारी और यूनियन के पदाधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष श्री देवेन्द्र कुमार मिश्रा, प्रदेश महामंत्री श्री रामप्रीत यादव, प्रदेश संगठन मंत्री श्री बालमुकुंद स्याल, श्री ललित मोहन पाण्डे, श्री ललित पाण्डे, श्री गौरव गुप्ता, श्री रवि कुमार, श्री दीपक शाह, श्री मनीष कुमार और श्री शलज सक्सेना समेत कई कर्मचारी व पदाधिकारी उपस्थित रहे।
“संगठन ने मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और उच्च अधिकारियों से जल्द से जल्द प्रतिनिधिमंडल के साथ उच्चस्तरीय वार्ता कर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। अब देखना होगा कि शासन इस पर क्या रुख अपनाता है।”

