चम्पावत, 2 अक्टूबर 2026। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे ग्राम प्रधानों ने शुक्रवार को चम्पावत ब्लॉक में 2 अक्टूबर के अवसर पर आयोजित होने वाली सभी खुली बैठकों एवं सरकारी कार्यक्रमों का बहिष्कार किया। ग्राम प्रधानों का कहना है कि प्रदेश स्तर पर प्रधान संगठन की ओर से अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर देहरादून में धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
प्रधानों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में प्रधान संगठन का 28 सितंबर से देहरादून में धरना-प्रदर्शन जारी है। संगठन का कहना है कि लगातार अपनी मांगों को सरकार के समक्ष रखने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण चम्पावत ब्लॉक में 2 अक्टूबर को आयोजित होने वाली खुली बैठकों एवं अन्य सरकारी कार्यक्रमों के बहिष्कार का निर्णय लिया गया।
प्रधानों ने कहा कि उनका यह कदम अपनी मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक संगठन के निर्देशानुसार बहिष्कार एवं आंदोलनात्मक कार्यक्रम जारी रखे जाएंगे।
प्रधान संगठन की प्रमुख मांगें
1. ऑनलाइन हाजिरी की व्यवस्था समाप्त कर मजदूरी बढ़ाने की मांग
प्रधानों की मांग है कि VBSRAMG में मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति को ऑफलाइन किया जाए। उनका कहना है कि उत्तराखंड एक पर्वतीय राज्य है और ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के चलते ऑनलाइन हाजिरी लगाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही मजदूरों की मजदूरी 500 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये किए जाने की मांग की गई है।
2. ग्राम प्रधानों को 20 हजार रुपये मानदेय और जीवन बीमा
ग्राम प्रधानों ने न्यूनतम 20 हजार रुपये मासिक मानदेय दिए जाने की मांग की है। साथ ही ग्राम प्रधानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनका जीवन बीमा कराने तथा प्रधानों का मानदेय ग्राम पंचायत की अपनी निधि से नहीं दिए जाने की मांग भी रखी गई है।
3. 10 लाख रुपये तक के कार्य ग्राम पंचायत को सौंपने की मांग
संगठन की मांग है कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में किसी भी विभाग द्वारा स्वीकृत 10 लाख रुपये तक के विकास कार्यों की कार्यदायी संस्था ग्राम पंचायत को बनाया जाए, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों का बेहतर संचालन हो सके।
4. पंचायती राज एक्ट के 29 विभागों का अधिकार ग्राम पंचायतों को देने की मांग
प्रधान संगठन ने पंचायती राज एक्ट में निर्धारित 29 विभागों को ग्राम प्रधानों को सौंपने की मांग की है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए गांवों पर विशेष ध्यान दिए जाने की भी मांग उठाई गई है।
प्रधानों का कहना है कि उनकी मांगें ग्राम पंचायतों के अधिकार, ग्रामीण विकास, रोजगार और ग्राम प्रधानों के सम्मान एवं सुरक्षा से जुड़ी हुई हैं। उनका कहना है कि संगठन पूरी तरह एकजुट है और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
एकजुट होकर आंदोलन में शामिल हुए पदाधिकारी एवं प्रधान
2 अक्टूबर को हुए बहिष्कार कार्यक्रम में ब्लॉक अध्यक्ष प्रमिला ज्याल, तहसील अध्यक्ष राधिका चंद, कुमाऊँ महामंत्री इंद्रदेव विश्वकर्मा, कविता पचौली, गीता चंद, सरोज देवी, कंचन देवी, ललिता खत्री, शहाना खातून, निर्मला देवी, दीपक पचौली, हरीश लापड़, योगेश चंद, प्रेम सिंह ज्याला, प्रकाश राय, राजेंद्र कुमार सहित अन्य ग्राम प्रधान एवं संगठन से जुड़े सदस्य मौजूद रहे।
प्रधानों ने कहा कि संगठन की एकजुटता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और सभी प्रधान एक मंच पर खड़े होकर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक संगठन के निर्णय के अनुसार आंदोलनात्मक गतिविधियाँ जारी रहेंगी।


