पंचमुखी गौशाला समिति ने पुष्कर सिंह धामी को अंतिम चेतावनी पत्र भेजते हुए साफ शब्दों में ऐलान किया है कि पंचमुखी गौशाला को किसी भी कीमत पर न तो तोड़ा जाएगा और न ही स्थानांतरित होने दिया जाएगा।
टनकपुर स्थित पंचमुखी गौशाला पिछले 15 वर्षों से सड़क दुर्घटनाओं में घायल, निराश्रित और असहाय गोवंश की सेवा में निरंतर जुटी हुई है। समिति के अनुसार अब तक सैकड़ों गोवंशों का उपचार, संरक्षण और पालन-पोषण पूरी तरह निजी संसाधनों और जनसहयोग से किया गया है।
वर्तमान में गौशाला में लगभग 80 गोवंश सुरक्षित हैं। राजकीय पशु चिकित्सालय के समीप स्थित होने के कारण यह स्थान रात्रिकालीन आपात उपचार के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। समिति का कहना है कि इसका कोई व्यवहारिक वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं है।
समिति ने अपने पत्र में अत्यंत स्पष्ट और चेतावनी भरे शब्दों में कहा है कि यह पंचमुखी गौशाला वे पूर्ण श्रद्धा और संकल्प के साथ मां कोटगाड़ी को समर्पित कर चुके हैं।
यदि किसी भी व्यक्ति या प्रशासनिक व्यवस्था ने इस गौशाला को तोड़ने या स्थानांतरित करने का साहस किया, तो वह स्वयं मां कोटगाड़ी के कोप का भागीदार बनेगा।
समिति ने यह भी कहा कि यह भूमि वर्षों से गोमाता का गोचर स्थल रही है और इसे केवल प्रशासनिक भूमि कहकर गौवंश को हटाना आस्था और परंपरा पर आघात है।
गौशाला समिति का दावा है कि मार्च माह के प्रथम सप्ताह में प्रशासन द्वारा पुनः गौशाला को ध्वस्त करने की तैयारी की जा रही है। इससे पूर्व भी एक बार गौशाला को तोड़ा गया था, जब स्थानीय स्तर पर संगठित विरोध नहीं हो सका था।
लेकिन इस बार स्थिति अलग बताई जा रही है।
खुली चुनौती: “अब गौशाला नहीं टूटेगी”
समिति ने प्रशासन को चुनौती देते हुए तीन स्पष्ट घोषणाएँ की हैं:
किसी भी परिस्थिति में पंचमुखी गौशाला को टूटने नहीं दिया जाएगा।
यदि प्रशासन ने बलपूर्वक कार्रवाई की, तो समस्त गौ-सेवक अपने शरीर, समय और सामर्थ्य की अंतिम सीमा तक रक्षा करेंगे।
आवश्यकता पड़ी तो आमरण अनशन और प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
समिति ने यह भी कहा है कि किसी भी टकराव की नैतिक, सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी शासन और स्थानीय प्रशासन की होगी।
मुख्यमंत्री से समिति ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
गौशाला को ध्वस्त या स्थानांतरित करने की सभी प्रक्रियाएँ तत्काल निरस्त की जाएँ।
पंचमुखी गौशाला को स्थायी गौशाला घोषित कर यथास्थान संरक्षित किया जाए।
गौ-सेवकों को बिना हस्तक्षेप सेवा कार्य करने दिया जाए।
निर्णायक मोड़ पर टनकपुर
टनकपुर में यह मुद्दा अब केवल भूमि विवाद का नहीं, बल्कि आस्था, सेवा और सामाजिक अस्मिता का प्रश्न बनता जा रहा है।
पंचमुखी गौशाला समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि यह पत्र उनकी “अंतिम चेतावनी” है। अब देखना यह होगा कि शासन इस चुनौती को संवाद से सुलझाता है या टनकपुर एक बड़े जनआंदोलन की ओर बढ़ता है।


