टनकपुर में आयोजित सरस मेले की रौनक के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने उत्सव की खुशियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
टनकपुर में चल रहे सरस मेले में शामिल होने आए कुछ परिवारों को उस समय भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, जब उनके वाहनों के टायर जानबूझकर क्षतिग्रस्त कर दिए गए। घटना सेंट फ्रांसिस स्कूल के निकट स्थित पूर्णागिरी सर्विस स्टेशन (चंद पेट्रोल पम्प) की बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि मेले में अत्यधिक भीड़ के कारण पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में कुछ परिवारों ने पेट्रोल पम्प परिसर में पर्याप्त खाली स्थान देखकर अपने वाहन सावधानीपूर्वक इस प्रकार खड़े किए कि किसी भी प्रकार की आवाजाही में बाधा न हो। परिवारों में गर्भवती महिलाएं, छोटे-छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे, जो मेले की खुशियां साझा करने आए थे।
लेकिन जब ये लोग मेला देखकर वापस लौटे, तो उनके सामने एक चिंताजनक और दुखद दृश्य था। आधा दर्जन से अधिक वाहनों के टायरों की हवा केवल निकाली ही नहीं गई थी, बल्कि टायरों के वाल्व भी निकाल दिए गए थे और कई टायरों में नुकीली वस्तु से छेद कर उन्हें बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया था।
रात लगभग 10 बजे से 12 बजे समय तक परिवार अपने बच्चों और महिलाओं के साथ घंटों तक वहीं फंसे रहे। गर्भवती महिला और छोटे बच्चों की असुविधा ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।

पुलिस प्रशासन सरस मेले में तैनाती के कारण देर से मौके पर पहुंचा। मौके पर पहुंचे कर्मियों ने लिखित शिकायत देकर थाने में एफआईआर दर्ज कराने की बात कही, लेकिन सवाल यह है कि क्या रात के समय परिवारों को वहीं छोड़कर कोई व्यक्ति पैदल थाने तक जाता? क्या यह मानवीय दृष्टिकोण से उचित अपेक्षा थी?
यह घटना केवल वाहनों के टायर पंचर होने की नहीं है — यह हमारी सामाजिक संवेदनहीनता की तस्वीर है। जब कोई परिवार अपने बच्चों के साथ मेले में खुशियां बांटने आता है और बदले में उसे डर, असुरक्षा और असहायता का अनुभव होता है, तो यह पूरे शहर की छवि पर असर डालता है।
और अब प्रश्न और भी बड़ा हो जाता है। निकट भविष्य में लगने वाला विश्वप्रसिद्ध पूर्णागिरी मेला भी हजारों श्रद्धालुओं और यात्रियों को आकर्षित करता है। यदि उनके साथ भी ऐसा ही व्यवहार हुआ तो वे यहां से कैसी स्मृतियां लेकर जाएंगे? क्या टनकपुर एक सुरक्षित और स्वागतयोग्य शहर के रूप में याद किया जाएगा, या अव्यवस्था और असुरक्षा के प्रतीक के रूप में?
सबसे गंभीर आरोप यह है कि पेट्रोल पंप के निजी वाहन और वहां नियमित रूप से खड़े रहने वाले स्कूलों के वाहन सुरक्षित रहे, जबकि बाहर से आए परिवारों के वाहन ही निशाना बने।
पेट्रोल पंप प्रबंधन की ओर से “हमें कुछ नहीं पता” कहकर पल्ला झाड़ लिया गया। सीसीटीवी फुटेज मांगने पर भी टालमटोल की गई। इतना ही नहीं, कुछ महिलाओं के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार की शिकायत भी सामने आई है।
मानवता का तकाज़ा है कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि रखा जाए।
सरस मेला केवल व्यापार और मनोरंजन का मंच नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक सौहार्द का प्रतीक है। यदि ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तो यह पूरे समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है।
प्रशासन से अपेक्षा है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए — ताकि उत्सव की खुशियां भय और असुरक्षा में न बदलें।


