टनकपुर में एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ती हुई देखने को मिलीं।
स्कूलों की छुट्टी का समय—दोपहर 12:30 बजे, जब नन्हे बच्चे अपने माता-पिता के साथ घर लौटते हैं, ठीक उसी वक्त भारी-भरकम ट्रकों की आवाजाही बदस्तूर जारी रही।
आज का नजारा और भी डरावना था।
शक्तिमान माल क्षेत्र से जुड़ा एक भारी ट्रक, बड़े-बड़े टायरों से लदा हुआ, सड़क पर आगे-पीछे किया जा रहा था। उसी दौरान सड़क पर छोटे बच्चे, अभिभावक, स्कूटी और बाइक सवार मौजूद थे। ज़रा-सी चूक और बड़ा हादसा हो सकता था।
जब एक पत्रकार और स्थानीय लोगों के परिजनों ने ट्रक को रोकने का आग्रह किया, तो स्थिति और भयावह हो गई।
ट्रक के क्लीनर ने पत्रकार से बदतमीजी की, बेखौफ होकर आगे बढ़ने का इशारा करता रहा, जबकि ड्राइवर ने भी बिना रुके ट्रक को आगे बढ़ाना जारी रखा।
न तो बच्चों की परवाह, न कानून का डर।
मौके पर मौजूद अभिभावकों में भारी आक्रोश देखने को मिला।
एक अभिभावक ने कहा:
“हम रोज़ डर के साए में बच्चों को लेने आते हैं। क्या हमारे बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं?”
एक अन्य परिजन बोले:
“पहले भी हादसे हो चुके हैं, क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है?”
यह पहला मामला नहीं है।
पूर्व में कई गंभीर हादसे हो चुके हैं, जिनके बाद कुछ समय के लिए स्कूल छुट्टी के समय भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई गई थी।
लेकिन आज फिर वही हालात—
सवाल यह है कि क्या प्रशासन की याददाश्त इतनी कमजोर है?

यह मामला केवल ट्रक चालक की लापरवाही नहीं, बल्कि
यातायात विभाग की निष्क्रियता,
स्थानीय प्रशासन की चुप्पी,
और कहीं न कहीं स्कूल प्रबंधन की अनदेखी को भी उजागर करता है।
यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो
किसी मासूम की जान जाने के बाद ही कार्रवाई होगी?
स्थानीय लोगों और अभिभावकों की स्पष्ट मांग है कि—
स्कूल छुट्टी के समय भारी वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए
मौके पर ट्रैफिक पुलिस की स्थायी तैनाती हो
नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए
आज यह केवल एक खबर है,
कल यह किसी घर का मातम न बन जाए—
प्रशासन को अभी जागना होगा।


