टनकपुर/हल्द्वानी/देहरादून।
जहां एक ओर दीपावली नज़दीक है, घर-घर रोशनी और खुशियों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड रोडवेज वर्कशॉप के तकनीकी कर्मचारियों के घरों में इस बार अंधेरा पसरा हुआ है। वजह — लगभग दो महीने से वेतन का भुगतान न होना।
ये वही तकनीकी कर्मचारी हैं जो हर दिन बसों के इंजन में जान फूंकते हैं, सर्दी-गर्मी और बारिश में अपनी पसीने से भीगी कमीज़ में यात्रियों की सुरक्षा के लिए दिन-रात जुटे रहते हैं।
लेकिन आज वही कर्मचारी अपने घर के चूल्हे जलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
“बसें तो रोज़ सड़क पर दौड़ती हैं, लेकिन हमारी ज़िंदगी ठहर गई है।”
— कहते हैं एक कर्मचारी, जिनके बच्चों की स्कूल फीस बाकी है, घर का राशन खत्म होने को है और दीपावली की मिठास उनके आंसुओं में घुल चुकी है।
वर्कशॉप के सभी तकनीकी कर्मचारियों ने कार्य का पूर्ण बहिष्कार कर दिया है। उनका कहना है कि वर्षों से “अल्प वेतन” में काम करने के बावजूद अब उन्हें दो महीने से तनख्वाह नहीं मिली। हालात ऐसे हैं कि कुछ कर्मचारी उधार लेकर घर चला रहे हैं, तो कुछ रोज़गार छोड़ने की सोच रहे हैं।
सरकार और विभागीय अधिकारी जब इस मुद्दे पर चुप हैं, तब कर्मचारियों के घरों में चूल्हे की जगह चिंता जल रही है।
दीपावली आने को है, लेकिन सवाल ये है —
क्या इस बार इन कर्मचारियों के घरों में दीए जलेंगे या फिर उनके बच्चों की आंखों में सिर्फ़ अधूरी उम्मीदों की लौ बचेगी?
रोडवेज के तकनीकी कर्मचारियों की ये पीड़ा सिर्फ़ एक वेतन की कहानी नहीं है,
ये उन अनदेखे हाथों की व्यथा है जो हर दिन हमारी यात्रा को सुरक्षित बनाते हैं,
पर अपनी मंज़िल तक पहुंचने से पहले ही थककर रुक जाते हैं।
दीपावली के अंधेरे में डूबी उम्मीदें: रोडवेज वर्कशॉप के तकनीकी कर्मचारियों का पूर्ण कार्य बहिष्कार — लगभग दो माह से नहीं मिली सैलरी ।
“अल्प वेतन, लंबा इंतज़ार — वेतन न मिलने से फूटा रोडवेज कर्मचारियों का ग़ुस्सा”



