चंपावत/टनकपुर। टनकपुर के नायकगोठ में जुलाई 2024 में हुए चर्चित गोलीकांड में सत्र न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए पिता-पुत्र को दोषी करार दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुज कुमार संगल की अदालत ने आरोपी राजीव सिंह और उसके पुत्र कार्तिक ठाकुर को अलग-अलग धाराओं में दोषी मानते हुए 7-7 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। मामले में अदालत ने अर्थदंड की राशि में से 60 हजार रुपये घायल दीपक सिंह को प्रतिकर के रूप में देने का भी आदेश दिया है।
घटना 8 जुलाई 2024 की रात ग्राम नायकगोठ, टनकपुर की है। अभियोजन के अनुसार, पारिवारिक विवाद के दौरान राजीव सिंह ने अपने पुत्र कार्तिक ठाकुर को उसके चाचा दीपक सिंह पर हमला करने के लिए उकसाया। आरोप था कि इसके बाद कार्तिक ने तमंचे से दीपक सिंह पर गोली चला दी। गोली पीठ के निचले हिस्से में लगी और पेट से बाहर निकल गई। गंभीर रूप से घायल दीपक सिंह को उपचार के लिए बरेली के श्री राममूर्ति अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी दो जटिल सर्जरी हुईं और काफी प्रयास के बाद उनकी जान बच सकी।
मामले की विवेचना उपनिरीक्षक सुरेन्द्र सिंह कोरंगा ने की। पुलिस ने घटना के तीसरे दिन ही दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद 12 जुलाई 2024 को कार्तिक ठाकुर की निशानदेही पर किरोड़ा पुल के नीचे पत्थरों के बीच छिपाकर रखा गया तमंचा और दो जिंदा कारतूस बरामद किए गए।
इस मामले की विवेचना में पुलिस द्वारा वैज्ञानिक एवं डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने पर भी अदालत ने विशेष ध्यान दिया। बरामदगी की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई और वीडियो की पेनड्राइव की हैश वैल्यू भी सुरक्षित रखी गई। वहीं, देहरादून एफएसएल की रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई कि घटनास्थल से मिला खोखा उसी तमंचे से फायर किया गया था।
अदालत ने घायल दीपक सिंह, उनकी पत्नी प्रेमा सिंह और बेटी सोनाक्षी की गवाही को विश्वसनीय माना। बचाव पक्ष की ओर से एफआईआर में देरी, पारिवारिक रंजिश और गवाहों के बयानों में विरोधाभास जैसे तर्क रखे गए, लेकिन अदालत ने इन्हें दोषियों को राहत देने के लिए पर्याप्त नहीं माना।
न्यायालय ने कार्तिक ठाकुर को हत्या के प्रयास, साक्ष्य विलोपन और धमकी देने से संबंधित धाराओं में दोषी ठहराते हुए क्रमशः 7 वर्ष, 2 वर्ष और 2 वर्ष के कारावास तथा संबंधित अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, उसके पिता राजीव सिंह को दुष्प्रेरण के अपराध में दोषी मानते हुए 7 वर्ष के कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
हालांकि, आर्म्स एक्ट की धारा 25 के आरोप में कार्तिक ठाकुर को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने बरामदगी फर्द में 8 एमएम और 9 एमएम कारतूस को लेकर सामने आई तकनीकी विसंगति तथा संबंधित सेक्शन आदेश के पर्याप्त रूप से साबित न होने को इसका आधार माना।
अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता विद्याधर जोशी ने पैरवी की। अदालत ने विवेचना के दौरान वैज्ञानिक साक्ष्यों को जुटाने और सुरक्षित रखने के लिए विवेचक उपनिरीक्षक सुरेन्द्र सिंह कोरंगा की कार्यशैली की भी सराहना की।
फैसला सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को सजायाबी वारंट के साथ जिला कारागार पिथौरागढ़ भेज दिया गया।


