टनकपुर, 19 अगस्त। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत कारीगरों को आधुनिक तकनीक, डिजिटल वित्तीय सेवाओं, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जोड़ने के उद्देश्य से राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) टनकपुर में जागरूकता एवं क्षमता-वर्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के एमएसएमई-डीएफओ हल्द्वानी की ओर से किया गया। कार्यक्रम में टनकपुर क्षेत्र के करीब 120 कारीगरों एवं हितधारकों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं और सरकारी सहायता की जानकारी देने के साथ ही उन्हें बदलते दौर के अनुरूप आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों से जोड़ना रहा। इस दौरान कारीगरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ब्रांडिंग, मार्केटिंग, वित्तीय साक्षरता और डिजिटल भुगतान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण के माध्यम से बताया गया कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कर वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता, पहचान, बाजार पहुंच और व्यवसायिक संभावनाओं को किस प्रकार बेहतर बना सकते हैं।


कार्यक्रम में गवर्नमेंट आईटीआई टनकपुर के कार्यदेशक गिरीश चंद्र जोशी, चम्पावत की मुख्य प्रशासनिक अधिकारी उमा रावत, प्रशासनिक अधिकारी विजय नेगी सहित आईटीआई का समस्त स्टाफ मौजूद रहा।
पंजाब नेशनल बैंक, टनकपुर के शाखा प्रबंधक ने कारीगरों को बैंक की विभिन्न योजनाओं, ऋण सुविधाओं और वित्तीय साक्षरता के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने सुरक्षित एवं प्रभावी बैंकिंग सेवाओं के उपयोग, डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय अनुशासन के महत्व को समझाया। कारीगरों को व्यवसाय के लिए उपलब्ध वित्तीय सुविधाओं का बेहतर उपयोग करने के लिए भी प्रेरित किया गया।

वहीं इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) और डाकघर के प्रतिनिधियों ने डिजिटल वित्तीय सेवाओं एवं डिजिटल भुगतान के संबंध में जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान कारीगरों को डिजिटल लेन-देन को आसान बनाने के लिए QR कोड स्कैनर तैयार करने और बैंक खाते खोलने में भी सहायता उपलब्ध कराई गई।
एसपीएमयू देहरादून के राहुल श्रीवास्तव और आयुषी रावत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग और इसकी संभावनाओं पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कारीगरों को बताया कि AI का इस्तेमाल उत्पादों की प्रस्तुतीकरण, प्रचार-प्रसार, व्यवसायिक कार्यों और बाजार विस्तार में किस तरह किया जा सकता है। कारीगरों को आधुनिक तकनीक को अपने पारंपरिक हुनर के साथ जोड़कर व्यवसाय को नई दिशा देने के लिए प्रेरित किया गया।
मैनेजर, इन्क्यूबेशन सेंटर चम्पावत ने मार्केटिंग और ब्रांडिंग की प्रभावी रणनीतियों की जानकारी दी। उन्होंने कारीगरों को अपने उत्पादों की बेहतर पहचान बनाने, ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाने और आधुनिक विपणन तकनीकों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के उपाय बताए।
एमएसएमई-डीएफओ हल्द्वानी के सहायक निदेशक अमित मोहन ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं, कारीगरों के लिए उपलब्ध लाभों और सरकारी सहायता की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कारीगरों से प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना समेत अन्य सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक, बेहतर ब्रांडिंग और डिजिटल माध्यमों से जोड़कर कारीगर अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
डीपीएमयू चम्पावत के योगेश मेलकानी ने जनपद में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत उपलब्ध प्रशिक्षण, कौशल विकास और अन्य सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने कारीगरों को योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं का लाभ उठाने तथा प्रशिक्षण एवं सरकारी सहायता के माध्यम से अपने कारोबार को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रखते हुए उन्हें कौशल उन्नयन, आधुनिक तकनीक, डिजिटल लेन-देन, वित्तीय साक्षरता, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाए। आयोजकों ने कहा कि इन प्रयासों से कारीगरों की आजीविका मजबूत होने के साथ-साथ उनके पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार में नई पहचान और बेहतर अवसर मिल सकते हैं।


