टनकपुर। राजकीय महाविद्यालय टनकपुर में हिंदी दिवस के अवसर पर साहित्य, शिक्षा और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। प्राचार्य डॉ. अनुपमा तिवारी के संरक्षण एवं अध्यक्षता में आयोजित हिंदी पखवाड़े के तहत विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति आत्मीयता, सम्मान और गौरव की भावना विकसित करने के साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा को अभिव्यक्ति का अवसर देना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना एवं गणेश स्तुति के साथ हुई। हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत 12 सितंबर को निबंध, पोस्टर और मेहंदी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। वहीं 14 सितंबर को हिंदी दिवस समारोह में कविता, कविता प्रतियोगिता, नृत्य, सामूहिक गायन सहित अनेक प्रस्तुतियां हुईं। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग करते हुए अपनी कला और रचनात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर वाणिज्य विभागाध्यक्ष प्रो. आशुतोष कुमार ने हिंदी दिवस की प्रासंगिकता पर विचार रखते हुए हिंदी के व्यापक महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. स्वाति पंत, डॉ. विनोद जोशी, डॉ. अनिलेश मिश्रा एवं डॉ. ब्रह्मानंद ने भी हिंदी भाषा की उपयोगिता, विकास और वर्तमान दौर में इसके बढ़ते महत्व पर अपने विचार साझा किए।
हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. बीना ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिंदी के इतिहास, विकास, साहित्यिक समृद्धि और भारतीय समाज में उसकी भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करने तथा इसे केवल विषय के रूप में नहीं, बल्कि दैनिक जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में पूर्व छात्रा हिंदी मनीष एवं राजनीति विज्ञान के विद्यार्थी युवराज ने भी सहभागिता की। विभिन्न प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका प्रो. गोविंद बोरा, डॉ. चेतन जोशी, डॉ. विजय डामटाभी एवं डॉ. मीनाक्षी जोशी ने निभाई और प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक ने कहा कि हिंदी महज संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा, संवेदनाओं और राष्ट्रीय एकता को जोड़ने वाली सशक्त कड़ी है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी के सम्मान और प्रयोग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आग्रह किया।
प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्राचार्य डॉ. अनुपमा तिवारी ने पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी भाषा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी होती है। हिंदी के प्रति सम्मान हमारी सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने के साथ अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करता है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के प्राध्यापकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों का विशेष योगदान रहा। आयोजन के दौरान पत्रकार बंधुओं के सहयोग एवं योगदान के लिए भी आभार व्यक्त किया गया। अंत में हिंदी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार को निरंतर आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

